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12:48 pm June 19, 2024

मां हूंदी है,मां,ओ!

दुनिया वालेओ

आज सवेरे जब मैं अहमदाबाद से दिल्ली आ रहा था तो बांदीकुई स्टेशन पर ट्रेन रुकी केवल 3 मिनट के लिए।

मुझे चाय पीने की इच्छा हुई तो नीचे उतरा। तभी ध्यान किया की एक बुजुर्ग मां वा उसका 48..50 साल का बेटा आए हुए थे। और इधर ट्रेन में उसका छोटा बेटा,बहू और पोता-पोती दिल्ली जा रहे थे।स्वभाविक रूप से दादी ने पोते-पोती को तो प्यार देना ही था।जो उसका छोटा लड़का था शायद 40-42 साल का रहा होगा।वह दिल्ली में बिजली बोर्ड में सीनियर एक्सियन है,उसकी पत्नी प्रोफेसर हैं, पहले तो पैर छुए ही,जिस समय गाड़ी चलने लगी तो उससे पहले भी पैर छुए तो मां ने गले से लगाया और आंखों में आंसू आ गए।

तभी भाई ने कहा “बस बहुत हो गया भाई! चढ़ जा” इतना सुनना था की मां की डांट इस बड़े को पड़ गई।

मैं सोच में था कि इतना बड़ा अफसर है,पढ़ा लिखा है उम्र में भी बड़ा है किंतु मां उस को जिस ढंग से चूम रही थी और गाड़ी पर नहीं चढ़ने दे रही थी।

और मैं ध्यान से देखता रहा इस व्यक्ति के भी आंखों में आंसू थे और मां तो रोए जा ही रही थी।

बाद में मैंने पूछा तो उसने कहा “इस बार मैं 3 महीने बाद घर पर आया था,तो मां का प्यार इतना उमड़ना ही था। चाहे बेटा कितना बड़ा हो जाए,कितना बड़ा अफसर बन जाए,मां के लिए तो वैसा ही रहता है,न?”

वह फिर बोला “मेरे पास पैसा है,शोहरत है, सब मुझे सैल्यूट मारते हैं,पर जो सुख मुझे यहां गांव में आकर मां-बाप के पास मिलता है,उसकी कोई तुलना नहीं।”

तभी मुझे दीवार फिल्म का अमिताभ बच्चन का डायलॉग याद आ गया जब वह कहता है “मेरे पास बंगला है,गाड़ी है,पैसा है,तेरे पास क्या है?” तो शशिकपूर कहता है “मेरे पास मां है।”

अब हम जरा सोचें!अपने मां-बाप का कितना ध्यान रखते हैं,कितनी सेवा करते हैं उनकी?

~#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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