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1:45 pm June 19, 2024

अपने परिवारों से मिलते हैं,गहरे धार्मिक संस्कार!

कल सायंकाल मैं, रायपुर से जबलपुर के लिए ट्रेन में चढ़ा। मेरी सीट साइड अपर थी, पर नीचे की सीट भी खाली पड़ी थी। इसलिए मैं उस पर सो गया।

रात 1:30 बजे एक 28-29 साल का युवक आया और उसने मुझे कहा “अंकल यह मेरी सीट रिजर्व है आप ऊपर सो जाइए।”

मैंने कहा “अरे भाई! तुम 28-29 साल के हो, तुम ऊपर सो जाओ,इसमें क्या फर्क पड़ता है?”

वह बोला “मुझे सोना नहीं है। मुझे जागना है।”

मैंने कहा “क्यों?” तो उसने कहा “चंद्र ग्रहण लगा है।” अब मैंने सोचा ‘इससे बहस क्या करनी’ और मैं उपर वाली सीट पर जाकर सो गया।

सवेरे 3:45 बजे, मैं जबलपुर के लिए उतरने लगा तो देखा वास्तव में वह युवक बैठा था। मैंने उससे पूछा “तुम वास्तव में सोए नहीं?

उसने कहा “नहीं अंकल! मैंने आपको कहा था कि मुझे तो जागना ही है।”

मैंने कहा “चंद्रग्रहण पर जागने का क्या तुक है?”

वह चुप रहा। मैंने दोबारा से पूछा तो वह बोला “मुझे पता नहीं! पर दादी ने कहा था कि ग्रहण वाले दिन खाना भी नहीं और रात को सोना भी नहीं, बस राम का नाम जपना।”

मैंने पूछा “कितना पढ़े हो?”

तो वह बीटेक,एमबीए था। और एक कंपनी में जॉब कर रहा था।

मैं सोच में पड़ गया कि केवल दादी के कहने पर यह बीटेक एमबीए किया युवक रात भर जगा,की चंद्रग्रहण है।

हमारे परिवारों में ऐसे ही मिलते हैं धार्मिक संस्कार!

जय स्वदेशी जय भारत

नीचे:कल जबलपुर में आगामी १०-११-१२ अगस्त को होने वाले,विचार वर्ग हेतू कार्यकर्ताओं की बैठक के समय।

~#सतीश कुमार।

Author: swadeshijoin

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