• joinswadeshi2020@gmail.com
  • +91-9318445065
1:15 pm June 19, 2024

अभी भी पर्याप्त है साधु-संतों के प्रति, हिंदू समाज में सम्मान…!

मैं परसों दिल्ली से बेंगलुरु जा रहा था। रास्ते में दौंड स्टेशन पर जब गाड़ी रुकी,रात को 8:00 बज गए थे।मुझे भूख लगी थी तो सोचा कुछ चावल दाल खरीद लेता हूं। मैं अपने डिब्बे से उतर कर दाल रोटी बेचने वाली एक रेहड़ी के पास गया।

रेहड़ी वाले के पास उसी समय एक बुजुर्ग साधु भी आकर खड़ा हो गया।वह मराठी बोलता था।

रेहडी़ वाले ने कहा “₹30 में पांच रोटी और दाल मिलेगी।”

साधु के पास ₹10 थे, तो उसने वही दे दिए। पर पहले तो रेहड़ी वाले ने कहा कि “नहीं-नहीं! ₹30 में ही मिलेगा!”

तब मैंने उसको कहा “अरे! कैसे आदमी हो? एक वृद्ध साधु को रोटी नहीं खिला सकते? तुम इसको पूरी पांच रोटी और दाल दे दो, बाकी पैसे मैं दे दूंगा!”

मेरे यह कहते ही वह झेंप गया और उसने कहा “अरे नहीं साहब! मेरे से गलती हो गई। यह तो साधु है।” और उसने तुरंत उसको पांच रोटी और दाल दे दी और उसने ₹10 तो क्या ₹1 भी उससे नहीं लिया।

मैं सोचने लगा की हिंदू समाज के लोगों में अभी भी भगवाधारी के प्रति कैसी आस्था है? थोड़ा ध्यान दिलाना पड़ता है.. बस! इतनी ही बात है!

बाद में मैंने उस साधु से बातचीत की।साधु ने मुझे आशीर्वाद दिया। मैं भी थोड़ी अधिक बात उससे करना चाहता था। पर ट्रेन ने सीटी मार दी थी और मैं तुरंत ट्रेन में चढ़ गया…और चलती ट्रेन से ही अपने भविष्य को देखता रहा और पुराना गीत याद कर रहा था…

… मैं पल दो पल का शायर हूं,

पल दो पल मेरी कहानी है…!”

~#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

insta insta insta insta insta insta