• joinswadeshi2020@gmail.com
  • +91-9318445065
10:05 am June 27, 2024

आओ! अपने त्रिपुरा को जाने।

मेरा 4 दिन का असम और त्रिपुरा का प्रवास है। कल बैठक में मैंने पूछा, “इस त्रिपुरा का इतिहास और वर्तमान की विशेषताएं बताओ?”

तो अपने विचार विभाग प्रमुख बोले, “यह तीन तरफ से बांग्लादेश से व एक तरफ असम से लगा हुआ 38 लाख का प्रदेश है। अभी इसमें 2 सांसद हैं जो भाजपा के हैं। सरकार भाजपा की है, विप्लव देव नीचे से उठे हुए कार्यकर्ता अब वहां मुख्यमंत्री हैं।”

यहां की बोली कोक्बोरोक है वैसे बंगाली भाषी अधिक हैं। हिंदी सामान्य बोली और समझी जाती है।

मैं जब विश्वविद्यालय गया तो वहां हनुमान जी की संजीवनी ले जाते हुए पेंटिंग देखी, हिंदुत्व दिखता है स्पष्ट है।

यहां पाइनएप्पल बहुत होता है। रबड़, बांस ड्रैगन फ्रूट देश से निर्यात भी होता है। 1990 से 2000 के बीच में क्रिश्चियन आतंकी बहुत थे, अब ना के बराबर हैं।

यहां गुमटी नदी बहती है, माता त्रिपुर सुंदरी देवी का ऐतिहासिक मंदिर श्रद्धा का केंद्र है।

कुल 38 लाख की जनसंख्या में 8.6 लाख मुस्लिम व 4.35 लाख ईसाई हैं। केन्द्रिय विश्वविद्यालय है, जिससे 54 महाविद्यालय जुड़े हैं। लगातार कमुनिस्ट पार्टी का शासन रहने से विकास बहुत कम है। संघ की 240 शाखाएँ चलती हैं। 11 प्रचारक विस्तारक भी हैं। मजदूर संघ, किसान संघ, विश्व हिन्दू परिषद आदि सब हैं।

स्वदेशी की इकाई अभी नई बनी है, किंतु 8 में से 6 जिलों में इकाइयां हैं।अ.भा. संघर्ष वाहिनी प्रमुख अन्नदाशंकर पाणिग्रही जी ने काफी परिश्रम कर यहां कार्य खड़ा किया है। आज इस प्रांत की बैठक हुई। इस क्षेत्र में स्वदेशी, हिंदुत्व की बहार आगे भरपुर बहेगी, ऐसा विश्वास कार्यकर्ताओं ने प्रकट किया।

नीचे: अगरतला (त्रिपुरा की राजधानी) में, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में |

Author: swadeshijoin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

insta insta insta insta insta insta