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2:01 pm June 19, 2024

आपसी प्रेम,तालमेल से कर सकते हो कमाई, आपस में लड़कर नहीं।

मैं आज सवेरे, बस से सिरसा से दिल्ली आया।कोई 4:30 बजे का समय था।वहां चार-पांच ऑटो वाले आ गए। मैंने पूछा एक से~ “क्या लेगा?”

वह बोला “₹300!” मैंने कहा “दिन में डेढ़ सौ लगते हैं,इस समय तेरे को 200 लेने चाहिएं!”

पहले तो वह नहीं मान रहा था फिर कहने लगा “कोई सवारी मिल गई,तो बैठा लूं?” मैंने कहा “बैठा ले!

पर फिर मैं ₹150 दूंगा!”

खैर,थोड़ी देर में दूसरी बस आ गई।उससे वह एक सवारी को लेकर आया। किंतु दूसरे ऑटो वाले ने उस सवारी के कान में कुछ कहा और वह सवारी इस ऑटो को छोड़ गई। अब यह उससे लड़ने लगा “कि तूने मेरी सवारी भगा दी।”

और वह दूसरे ऑटो वाला थोड़ी देर में घूमकर मेरे पास आया और कहने लगा “₹180 में तो ओला भी चली जाएगी।सर,आप यह छोड़ दो।”

मैंने उसको डांटा “अरे! तुम आपस में ही लड़कर, एक दूसरे की सवारियां खराब कर रहे हो। अपना ही तो नुकसान करोगे।”

तब यह दूसरे वाला बोला “सर! पहले ये मेरी दो,सवारियां खराब कर चुका है। अब मैं इसकी कर रहा हूं।”

मैंने पहले वाले को, जिसके आटो में मैं बैठा था, बुलाया और पूछा तूने इसकी सवारी खराब की थी?” वो बोला “नहीं! ये झूठ बोल रहा है।”

दोनों एक दूसरे पर झूठ बोलने का आरोप लगाने लगे। मैंने सोचा सच्चाई कैसे पता करूं?

मुझे पता था,यह ऑटो वाले आमतौर पर शिव भक्त होते हैं।

तो मैंने कहा “तुम शिव भोले की कसम खाओ!”

अब जिस ऑटो मे मैं बैठा था, उस वाला बोला “सर!कसम तो नहीं खाऊंगा।”

तो मैंने कहा “इसका मतलब पहले गलती तूने ही की है।” उसने आंखें नीचे कर लीं।

मैंने और भी तीनों- चारों ऑटो वालों को इकट्ठा कर लिया और उनको प्यार से समझाया “देखो आपस में मिलजुल के रहोगे, तो तुम बहुत अच्छा कमाओगे। नहीं तो आपस में ही एक दूसरे का नुकसान करोगे,सवारियां फायदा उठाएंगी। क्यों?”

सब ने हामी भरी तो मैं ऑटो को लेकर चला। रास्ते में मैंने उसका नाम व कितने बच्चे हैं? पूछा!

वह बोला “मेरा नाम गौरव है,एक 2 साल का प्यारा बेटा है।” फिर वह पूछने लगा “सर! आप यह सारी बातें क्यों कर रहे हो?”

मैंने कहा “इसलिए कि मुझे तुम जैसे लोगों से ना केवल प्यार है, बल्कि तुम जैसे लोगों के लिए ही तो मैं जिंदगी लगा रहा हूं।”

वह आश्चर्य से मेरी तरफ देखने लगा। खैर फिर स्वदेशी कार्यालय आ गया। मैंने उसको ₹210 दिए। वह देखने लगा मैंने कहा “200 तो तेरे और ₹10 बेटे के लिए। उसकी आंखें चमक गईं। वह पैर छूकर ऑटो की तरफ बढ़ा, तो मैंने कहा “ठहर जरा! तेरे साथ सेल्फी भी लेता हूं!अब तो उसकी आंखों में छलक आए आंसू, मैं साफ देख सकता था।जो भी हो मेरे मन को तसल्ली हुई और मैं ठेंगड़ी जी का स्मरण करते हुए कार्यालय की सीढ़ियां चढ़ गया।…जय स्वदेशी!

नीचे:कल सिरसा में हुई स्वदेशी संगोष्ठी में विभाग सहसंयोजक दर्शन चावला जी के परिवार के साथ,व ऑटो चालक गौरव के साथ सेल्फी।

~#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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