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11:49 am June 19, 2024

….और इस तरीके से खड़ा हुआ है,

भारत का सबसे बड़ा मजदूर संगठन!!

गत मंगलवार को मैं भारतीय मजदूर संघ के दिल्ली कार्यालय में गया।

श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की जन्म शताब्दी मनाने के बारे में एक बैठक थी। जब बैठक से निकले तो मैंने देखा कि मजदूर संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष सजीनारायण जी के पास कोई वाहन नहीं था।

तो मैंने उन्हें कहा “आइए! स्वदेशी की गाड़ी तो आ ही गई है,मैं आपको छोड़ देता हूं।”

फिर मैंने उत्सुकता से पूछा “क्यों,मजदूर संघ की अपनी गाड़ी नहीं है क्या?”

उन्होंने कहा “नहीं! ठेंगड़ी जी कहा करते थे कि सामान्य मजदूर को भी अपने जैसा लगना चाहिए इसलिए कार की आवश्यकता नहीं,फिर आजकल ऑटो या टैक्सी तो मिल ही जाते हैं।”

फिर मैंने ध्यान किया कि इस बड़े मजदूर संगठन के अध्यक्ष व महामंत्री के कमरे में कोई A.C. भी नहीं था। तो मैंने उनसे पूछा “A.C. नहीं है?”

फिर वैसा ही जवाब उन्होंने दिया “सामान्य मजदूर के घर पर भी तो AC कहां होता है?”

आगे बोले “दत्तोपंत जी, हमें हर एक छोटी छोटी बात पर ध्यान रखने के लिए कहते थे। वास्तव में आज जो भारत का सबसे बड़ा मजदूर संगठन खड़ा हो गया है,तो उसमें इन सब बातों का ध्यान रखने के कारण ही हुआ है।”

सजीनारायण जी आगे बोले “हमारा तो उद्घोष ही है,

“मजदूर संघ की,क्या पहचान?

त्याग,तपस्या और बलिदान।”

सच में नेतृत्व के इस प्रकार के सादगी पूर्ण एवं उच्च आदर्शों का होने के कारण,देश ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा मजदूर संगठन खड़ा हो पाया है।”

और इसी महापुरुष ने स्वदेशी जागरण मंच खड़ा किया। तभी तो आज स्वदेशी भी इतने विशाल स्तर पर पहुंच गया है।

नीचे:कल हिमाचल में पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में ‘उतम खेती मध्यम व्यापार निम्न चाकरी’ पर बोलते हुए कुलपति प्रो:अशोक सरयाल व सतीश कुमार।

~#सतीश कुमार

Author: swadeshijoin

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