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5:57 am June 20, 2024

क्षमा! क्षमा! क्षमा!

स्वदेशी चिट्ठी के पाठक, बहनों एवं भाइयों!

सस्नेह नमस्ते।आज जैन मत की परंपरा के अनुसार क्षमा मांगने का दिन है। मैंने सोचा मैं जैन तो नहीं हुं, लेकिन कोई अच्छी चीज है तो उसका जरूर अनुसरण करना चाहिए।

*तभी मुझे पूजनीय गुरु जी (संघ के दूसरे सरसंघचालक) का एक प्रसंग याद आया।उन्होंने अपनी मृत्यु से पूर्व तीन पत्र लिखे थे। तीसरे पत्र में उन्होंने सब से क्षमा मांगी थी और संत तुकाराम का एक श्लोक उन्होंने उद्धृत किया था,जो बाद में स्मृति मंदिर के स्मृति चिन्ह पर लिखा भी गया ” शेवटजी विनवाणी, संतजनी…”।

तो मैंने भी सोचा क्यों ना इस दिन का उपयोग करते हुए मैं भी क्षमा मांग लूं। तो जैन पंथ की प्रार्थना को ही आज की चिट्ठी का हिस्सा बनाया।पर आज यह समाचारों की चिट्ठी नहीं,सभी स्वदेशी प्रेमी बंधुओं बहनों को मेरा व्यक्तिगत पत्र है।

*मेरे अहंकार से..यदि मैने किसी को नीचा दिखाया हो…*

*मेरे क्रोध से…. यदि किसी को दुःख पहुचाया हो।

*मेरे झूठ से… किसी को कोई परेशानी हुई हो।

*मेरे ना से…किसी की सेवा में,दान में,बाधा आयी हो।

*मेरे किसी व्यवहार से किसी को निराशा हुई हो।

*मेरे शब्दों से…जो किसी के हृदय को ठेस पहुचाई हो।

*जाने अनजाने में यदि मैं आपके कष्ट का कारण बना

*तो मैं मेरा मस्तक झुकाकर,हाथ जोड़कर, सहृदय..

आप से क्षमा मांगता हूं।

प्रसंगवश:-बहुत दिन पहले एक ट्रक के पीछे लिखा हुआ एक शेर पढ़ा था…जो यहां नीचे प्रस्तुत है।

“कुछ इस तरह से,जिंदगी को आसान कर लिया,

किसी से मांग ली माफी,किसी को माफ कर दिया।”

मां भारती की सेवा में,स्वदेशी के माध्यम से हम सब जुटे रहें। शेष शुभ… आपका #सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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