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5:24 am June 20, 2024

रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर कुल्हड़ में चाय?

छोटी प्रक्रिया, बड़ा बाजार, बड़ा रोजगार!!

अभी हाल ही में केंद्रीय परिवहन एवं MSME मंत्री नितिन गड़करी ने पीयूष गोयल को कहा है कि रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट्स और बस डिपो पर मिट्टी के कुल्हड़ में ही चाय बेची जाए।

इसके साथ ही शॉपिंग मॉल्स को भी मिट्टी के कुल्हड़ प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

यह कदम न केवल रोजगार में वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुखद संदेश है। क्योंकि इस कदम से प्लास्टिक और पेपर से बने कप का प्रयोग भी काफी हद तक कम होगा।

2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मिट्टी के बर्तनों और सेरामिक वस्तुओं के बाजार सेरामिक इंडस्ट्री(भारत में यह लघु व मध्यम उद्योग है.. इसमें चाइनीज न के बराबर है)का मूल्य लगभग 26 हजार करोड़ रुपए का है। और यह 2022 तक बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपए तक जाने का अनुमान है।

हमे जानकारी होनी चाहिए कि ऐसे उत्पाद बनाने वाले लघु उद्योग देश के सभी लघु उद्योगों का लगभग 50 प्रतिशत भाग है।

उतर प्रदेश के खुर्जा शहर में केवल एक वर्ष 2011 में ही कुल 85 करोड़ रुपए का मिट्टी से बने उत्पादों का व्यापार किया गया। जिसमे से 20% का निर्यात भी किया गया।

जरूरत है तो गांवों और छोटे शहरों में ऐसे उत्पाद बनाने वाले लोगो की पहचान करना और उन्हें ‘Cluster’ का हिस्सा बना कर लघु उद्योग की शुरुआत करना।

अगर सरकार द्वारा इस दिशा में कदम उठाए जाएं, तो कुम्हारों के लिए बाजार तक पहुंच बनाना निश्चित रूप से ही आसान हो जाएगा।

इसके अलावा अगर हम स्वदेशी प्रेमी जनता भी अपने घरों में मिट्टी के मटको के अलावा अन्य बर्तन भी मिट्टी के प्रयोग करें तो इस दिशा में अच्छे प्रयास कर सकते हैं।

~ स्वदेशी एजुकेटर के कलम से।

Author: swadeshijoin

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