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9:54 am June 19, 2024

शिक्षा, संस्कार व व्यक्ति निर्माण की

विराट साधना हैं, हमारे विद्यालय…।

परसों मैं, विद्या भारती के प्रशिक्षण वर्ग में जालंधर के पास रत्तेवाल गांव में गया।वहां पर पंजाब के 110 अध्यापकों का प्रशिक्षण वर्ग था।

उस वर्ग की अनुशासन व प्रशिक्षण प्रक्रिया देखकर किसी को भी आश्चर्य व गर्व हो जाएगा कि किस प्रकार की शिक्षण साधना सारे भारत में अपने लोगों द्वारा हो रही है।

बाद में मैंने हंसते खेलते युवा अध्यापक भैया बहनों से बातचीत भी की।

फिर मैंने क्षेत्र संगठन मंत्री विजय नड्डा जी से पूछा.. “देशभर में हमारे कुल कितने विद्यालय चलते होंगे?”

तो उन्होंने बताया ” कोई 13000 नियमित विद्यालय व 12000 एकल विद्यालय-संस्कार केंद्र हैं।”

इसी क्रम में विजय जी ने बताया “हमारे विद्यालयों में कुल दो लाख से अधिक अध्यापक पढ़ाते हैं।और 35 लाख से अधिक बच्चे हमारे यहां पढ़ते हैं।”

भारत ही नहीं दुनिया की यह सबसे बड़ी एकात्म शिक्षण व्यवस्था है।

मैंने पूछा “इतना बड़ा संस्थान व प्रक्रिया, 50 वर्षों से अधिक समय से, ठीक-ठाक चल रही है।इसका मूल कारण क्या है?”

तो उन्होंने बताया “कोई 50 प्रचारक व 400 पूर्णकालिक कार्यकर्ता, केवल यह सब ठीक-ठाक चले और बढ़े, इसी के लिए लगे हुए हैं।”

वाह! अब ध्यान में आया कि इस विराट शिक्षण महल की नींव के पत्थर कौन हैं?

मैंने आगे पूछा “हमारे बच्चों के शिक्षा का स्तर कैसा रहता है?”

तो वे बोले “पढ़ाई में तो हमारे विद्यालयों के बच्चे अपने-अपने प्रांतों में टॉप पर रहते ही हैं।किंतु बड़ी बात है कि इन विद्यालयों से बच्चा,अच्छी पढ़ाई के साथ संस्कार व भारत के प्रति देशभक्ति के भाव से परिपूर्ण होकर निकलता है। एक कर्तव्यनिष्ठ व योग्य नागरिक बन के निकलता है।”

यही है वास्तव में राष्ट्र साधना…

साधना नित्य साधना

साधना अखंड साधना

नीचे रत्तेवाल में शिक्षकों के साथ विषय रखते हुए

~#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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