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12:35 pm June 19, 2024

संघ संगठन के दमदार संस्कार।

प्रचंड बहुमत, निर्विवाद सत्ता का मुकुट, ध्वस्त विपक्ष! इतना सब पर्याप्त है किसी देवता का भी अहंकार से सीना भरने के लिए।

किंतु यह संघ के पुराने संस्कार ही हैं की इतना भारी बहुमत आने के बाद वे अपने वरिष्ठ बुजुर्ग नेता आडवाणी जी व मुरली मनोहर जोशी जी (जो अब ना पार्टी का कोई दायित्व लिए हैं,ना ही सांसद हैं) के घर गए, पैर छूकर आशीर्वाद लिया और सारा वृत्तांत बताया।

मानो पुत्र ने कमाई करके,पिता के पास लाकर, सारी धनराशि चरणों में रख दी हो। इसी समय पर ही अनेक राजनीतिक दल के नेता,अपने बुजुर्ग पिता को धक्का मारकर दल के अगुआ बने बैठे हैं।

यह वास्तव में परिणाम हैं, बचपन से प्राप्त संघ संगठन के संस्कारों का।

ऐसी ही दूसरी बात मैंने देखी।जब आज सायंकाल संसदीय दल की बैठक के बाद सभी सांसद अभिवादन कर रहे थे, तो नरेंद्र मोदी जी बाकी सब से तो हाथ मिला रहे थे, किंतु महिला सांसदों को केवल हाथ जोड़कर ही प्रणाम कर रहे थे।

आज सवेरे ही शाखा में सुभाषित बोल रहे थे “मातृवत परदारेषु….”

तो यह जो संस्कार हमें बाल्यकाल, युवावस्था में मिले उसी कारण से यह संभव हो रहा है।

सभी विरोधियों को हराकर, प्रचंड बहुमत प्राप्त करने का सामर्थ्य, व अपने बुजुर्गों,माताओं का मान रखने का संस्कार, दोनों ही संघ संस्कारों से प्राप्त हुए हैं

शाखा में गीत गाते ही हैं…

“व्यक्ति व्यक्ति में जगाए राष्ट्र चेतना

जन मन संस्कार करें यही साधना

साधना नित्य साधना,..साधना अखंड साधना

जय स्वदेशी जय भारत

#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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