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1:57 pm June 19, 2024

स्वतंत्र भारत के चार स्वदेशी प्रणेता!

[चिट्ठी पढ़कर वाल पर जय स्वदेशी-जय भारत लिख सकते हैं]

#दीनदयालउपाध्याय: जिन्होंने एकात्ममानव दर्शन लिखा। और जिनकी प्रसिद्ध उक्ति है “भारत की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करना हो और केवल दो ही शब्द प्रयोग करने हों तो वह हैं ‘स्वदेशी और विकेंद्रीकरण’

वे भारतीय जनसंघ के महामंत्री और अध्यक्ष रहे। 1967 में अचानक मृत्यु हुई किंतु स्वतंत्र भारत के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्वदेशी प्रवर्तक थे।

#दत्तोपंतठेंगड़ी: जिन्होंने 1955-56 में भारतीय मजदूर संघ, 1978-79 में भारतीय किसान संघ और 1991-92 में स्वदेशी जागरण मंच खड़ा किया। स्वदेशी आंदोलन को देशव्यापी बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वदेशी विचारों को ख्याति दिलवाने में जबरदस्त भूमिका निभाई।

लाखों कार्यकर्ताओं के प्रेरणा स्त्रोत बने।

#राजीवदीक्षित: आईआईटी कानपुर के इंजीनियर केवल 43 वर्ष की आयु में चले गए। किंतु उनके स्वदेशी और स्वास्थ्य संबंधी विचारों के भाषण उनकी मृत्यु के बाद भी हजारों लोगों को प्रेरणा देते हैं।

#बाबारामदेव: सर्वाधिक चर्चित, पातंजलि योग ट्रस्ट से योग-प्राणायाम अभ्यास से प्रारंभ। किंतु स्वदेशी उत्पाद सहित भारत में स्वदेशी आंदोलन के बड़े अगुआ हैं। प्रत्यक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों के मुकाबले स्वदेशी उत्पाद का विकल्प उन्होंने दिए।

इन सब को शत-शत प्रणाम

नीचे,बायें से प:दीनदयाल उपाध्याय,दत्तोपंत ठेंगड़ी,राजीव दीक्षित,बाबा रामदेव।

हैं ~#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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