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1:47 pm June 19, 2024

स्वदेशी वा रोजगार के विषयों की स्पष्ट व गहरी समझ है सुमित्रा ताई महाजन को, नमन!

मैं कल इन्दौर के प्रवास पर था। प्रांत टोली की बैठक के बाद लोकसभा की पूर्व अध्यक्षा सुमित्रा ताई महाजन जी से मिलने का कार्यकर्ताओं ने तय किया। दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म शताब्दी के सिलसिले में हमने बातचीत शुरू की।

तभी विषय खेती व रोजगार की तरफ मुड़ गया।

ताई बोली आजकल के पत्रकारों को और पढ़े लिखे लोगों को भारत में कैसे रोजगार पनपता है,इसकी समझ बहुत कम है।

मैंने पूछा “वह कैसे?”

तो उन्होंने बताया “कुछ दिन पहले एक खबर छप गई कि अभी भी बैल की जगह पर आदमी जोत कर हल खींच रहा है,मध्यप्रदेश में।”

मैंने पता किया तो वास्तव में खरपतवार निकालने के लिए एक छोटा हल लगाना पड़ता है और उसे आदमी ही खींचेगा तो ठीक रहेगा। यदि बैल या ट्रैक्टर लगाया तो वह मूल फसल को ही तबाह कर देगा।अब इस बात की समझ ना होने से अखबार में उल्टी खबर छप गई।

मैंने पूछा “जीरो बजट प्राकृतिक खेती के बारे में क्या कहना है?” तो ताई बोलीं “आचार्य देवव्रत जी से मैंने एक सांसदों की कार्यशाला भी करवाई थी। इससे किसान की आय भी बढ़ती है और फसल भी जैविक हो जाती है।

जब मैंने उन्हें रोजगार पर स्वदेशी की पुस्तक भेंट की तो उन्होंने कहा कि उनके एक परिचित जो चादर बुनने की खड्डी चलाते थे,उनका बेटा भी साथ साथ काम करने लग गया,आज बहुत अच्छा कमाता है जबकि इन पढ़े लिखों से पूछो तो वह कहेंगे यह बाल मजदूरी है।जिन्हें स्वाभाविक रूप से परिवार से स्किलिंग व रोजगार मिलने की प्रक्रिया का पता नहीं, ऐसे विदेशी चश्मे से देखने वालों को यह बाल मजदूरी लगती है। जबकि भारत में सहज स्वाभाविक परिवार से रोजगार मिलने की गारंटी होती थी।

मैं ताई की स्वदेशी, रोजगार पर सूझबूझ देख-सुनकर हैरान हो गया। और विनम्रता पूर्वक प्रणाम किया। वे लगातार इंदौर से 9 बार सांसद चुनी गई हैं,कभी हारी नहीं।

नीचे चित्र में: लोकसभा की पूर्व अध्यक्षा सुमित्रा महाजन जी को स्वदेशी-रोजगार पुस्तिका भेंट करते हुए, इंदौर स्वदेशी कार्यकर्ताओं के साथ..

~#सतीशकुमार

Author: swadeshijoin

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